साधना

Your Spiritual Journey

प्रेरणादायक प्रसंग रामकृष्ण परम हँस

हिन्दू मान्यता के अनुसार, ईश्वर को त्रिगुणा स्वामी कहा जाता हैं इसी तरह एक समान्य मनुष्य में भी तीन गुणों का वास होता हैं और इन्ही गुणों के कारण एक मनुष्य का स्वभाव बन जाता हैं | इसके जरिये आपको इन गुणों का महत्व बताते हैं |

तीन चौर थे,जो लूट के इरादे से एक व्यक्ति को पकड़ते हैं और उसका पूरा धन लूट लेते हैं अब तीनों विचार कर रहे हैं कि उस व्यक्ति का क्या करें ? पहला चौर कहता हैं – हमें इस व्यक्ति से क्या लाभ, इसे मार देना चाहिए | दूसरा चौर कहता हैं – नहीं, हमें इसे बाँध कर छोड़ जाना चाहिए | तीसरा चौर कहता हैं हमें जो चाहिए था, वो हमें मिल गया, अब हमें इसे छोड़ देना चाहिए |

एक ही परिस्थिति के तीन भाव हैं और यही भाव सांसारिक मनुष्य के व्यवहार को बनाते हैं |

पहला भाव हैं “तमोगुण”- यह भाव ह्रदयहिन हैं जो घृणा और पाप करना जानता हैं |
दूसरा भाव हैं “रजोगुण”, यह एक ऐसा भाव हैं जो मोह में फँसाता हैं |
तीसरा भाव हैं “सतोगुण”, यह सभी बंधनों को काटता हैं, इन्सान में प्रेम,दया और सदभाव भरता हैं और अन्य दोनों भाव का नाश करता हैं |

यह तीन भाव ही जीवन के आधार हैं इस भवसार को पार करने के लिए इन तीनो भावों का उचित मात्रा में पालन करना आवश्यक हैं | एक ही मनुष्य में इन तीनो भावों का समावेश होता हैं उसे सोच समझकर, धैर्य से इस्तेमाल करने वाला ही जीवन में सफल होता हैं |

 

 

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