करवा चौथ का व्रत महिलाओं के द्वारा अपने पति की लंबी उम्र के लिए किया जाने वाला उपवास होता है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार करवा चौथ का व्रत कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है।२०१७ में व्रत 8 अक्टूबर को है। करवा चौथ के सम्पूर्ण लाभ के लिए निम्न चीजों का ध्यान रखना आवश्यक है |

महिलाएं सुबह सूर्योदय से पहले उठकर सर्गी खाती हैं।
यह खाना उनकी सास बनाती हैं।
इसे खाने के बाद महिलाएं अपने शादी के जोड़े में सजधज कर पूरे दिन भूखी-प्यासी रहती हैं।
दिन में शिव, पार्वती और कार्तिक की पूजा की जाती है।
शाम को करवा देवी की पूजा होती है,जिसमें पति की लंबी उम्र की कामना की जाती है।
चंद्रमा दिखने पर महिलाएं छलनी से पति और चंद्रमा की छवि देखती हैं। पति इसके बाद पत्नी को पानी पिलाकर व्रत खुलवाता है।
करवा चौथ का मुहूर्त : इस दिन पूजा का मुहूर्त शाम छह बजकर 16 मिनट से सात बजकर 30 मिनट तक है।
करवा चौथ के दिन चंद्रोदय का समय रात आठ बजकर 40 मिनट है।
करवा चौथ का दिन और संकष्टी चतुर्थी, जो कि भगवान गणेश के लिए उपवास करने का दिन होता है, एक ही समय होते हैं। विवाहित महिलाएँ पति की दीर्घ आयु के लिए करवा चौथ का व्रत और इसकी रस्मों को पूरी निष्ठा से करती हैं। विवाहित महिलाएँ भगवान शिव, माता पार्वती और कार्तिकेय के साथ-साथ भगवान गणेश की पूजा करती हैं और अपने व्रत को चन्द्रमा के दर्शन और उनको अर्घ अर्पण करने के बाद ही तोड़ती हैं। करवा चौथ का व्रत कठोर होता है और इसे अन्न और जल ग्रहण किये बिना ही सूर्योदय से रात में चन्द्रमा के दर्शन तक किया जाता है। करवा चौथ के दिन को करक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। करवा या करक मिट्टी के पात्र को कहते हैं जिससे चन्द्रमा को जल अर्पण, जो कि अर्घ कहलाता है, किया जाता है। पूजा के दौरान करवा बहुत महत्वपूर्ण होता है और इसे ब्राह्मण या किसी योग्य महिला को दान में भी दिया जाता है।

करवा चौथ वाले दिन महिलाओं को विशेष तौर पर लाल कपड़े ही पहनने चाहिए क्योंकि लाल रंग हिन्दू धर्म में शुभ रंग होने का प्रतीक माना जाता है।

गलती से भी करवा चौथ के दिन नीले, भूरे और काले रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए। ऐसा कपड़े पहनने से इस दिन पूजा का फल प्राप्त नहीं होता है।

उपवास वाले दिन महिलाओं को किसी अन्य व्यक्ति को दूध,दही,चावल और सफेद कपड़ा नहीं देने चाहिए।

करवा चौथ वाले दिन महिलाओं को अपने से बड़ी उम्र की किसी भी बुजुर्ग महिलाओं का अपमान नहीं करना चाहिए। ऐसा करना अशुभ माना जाता है।