Tag archives for pooja

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भाई दूज की कथा

भाई दूज का त्योहार भाई बहन के स्नेह को सुदृढ़ करता है। यह त्योहार दीवाली के दो दिन बाद मनाया जाता है। हिन्दू धर्म में भाई-बहन के स्नेह-प्रतीक दो त्योहार मनाये जाते…
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Festivals

स्थिर लक्ष्मी के लिए इन विशेष लग्न में करें महालक्ष्मी पूजन

महालक्ष्मी पूजन के लिए मुहूर्त के साथ लग्न का भी विशेष ख्याल रखा जाता है। जानिए लग्न अनुसार क्या है मंगलमयी मुहूर्त..... न्या लग्न : प्रात: से तक। धनु लग्न…
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Mantras

देवी कवच/चण्डी कवच

देवी कवच विनियोग – ॐ अस्य श्रीदेव्या: कवचस्य ब्रह्मा ऋषि:, अनुष्टुप् छन्द:, ख्फ्रें चामुण्डाख्या महा-लक्ष्मी: देवता, ह्रीं ह्रसौं ह्स्क्लीं ह्रीं ह्रसौं अंग-न्यस्ता देव्य: शक्तय:, ऐं ह्स्रीं ह्रक्लीं श्रीं ह्वर्युं क्ष्म्रौं…
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Mantras

श्री नारायण कवच

न्यासः- सर्वप्रथम श्रीगणेश जी तथा भगवान नारायण को नमस्कार करके नीचे लिखे प्रकार से न्यास करें। अगं-न्यासः- ॐ ॐ नमः — पादयोः ( दाहिने हाँथ की तर्जनी व अंगुठा — इन…
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Mantras

श्री गोपाल सहस्त्रनामस्तोत्रम्

श्री गोपाल सहस्त्रनामस्तोत्रम्  कैलासशिखरे रम्ये गौरी पृच्छति शंकरम् । ब्रह्माण्डखिलनाथस्त्वं सृष्टिसंहारकारकः ॥१॥ त्वमेव पूज्यसे लोकैर्ब्रह्मविष्णुसुरादिभिः । नित्यं पठसि देवेश कस्य स्तोत्रं महेश्वर ॥२॥ आश्चर्यमिदमत्यन्तं जायते मम शंकर । तत्प्राणेश महाप्राज्ञ…
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Mantras

श्रीऋण हरण कर्तृ गणपति स्तोत्र मन्त्र

श्रीऋण-हरण-कर्तृ-गणपति-स्तोत्र-मन्त्र ध्यान ॐ सिन्दूर-वर्णं द्वि-भुजं गणेशं लम्बोदरं पद्म-दले निविष्टम्। ब्रह्मादि-देवैः परि-सेव्यमानं सिद्धैर्युतं तं प्रणामि देवम्।। ।।मूल-पाठ।। सृष्ट्यादौ ब्रह्मणा सम्यक् पूजितः फल-सिद्धये। सदैव पार्वती-पुत्रः ऋण-नाशं करोतु मे।।१ त्रिपुरस्य वधात् पूर्वं शम्भुना…
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Mantras

श्री कृष्ण सहस्त्रनाम स्तोत्र

श्री-कृष्ण-सहस्त्रनाम-स्तोत्र ॥ श्रीकृष्णाय नमः ॥ ध्यानम् शिखिमुकुटविशेषं नीलपद्माङ्गदेशं विधुमुखकृतकेशं कौस्तुभापीतवेशम् । मधुररवकलेशं शं भजे भ्रातुशेषं व्रजजनवनितेशं माधवं राधिकेशम् ॥<B> स्तोत्रम् कृष्णः श्रीवल्लभः शार्ङ्गी विष्वक्सेनः स्वसिद्धिदः । क्षीरोदधामा व्यूहेशः शेषशायी जगन्मयः…
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श्रीराधाकृष्णसहस्त्रनामस्तोत्रम्

ध्यानम् स्वभावतोऽपास्तसमस्तदोष – मशेषकल्याणगुणैकराशिम् । व्यूहाङ्गिनं ब्रह्म परं वरेण्यं ध्यायेम कृष्णं कमलेक्षणं हरिम् ॥ अङ्गे तु वामे वृषभानुजां मुदा विराजमानामनुरूपसौभगाम् । सखीसहस्त्रैः परिसेवितां सदा स्मरेम देवीं सकलेष्टकामदाम् ॥ सनत्कुमार उवाच…
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